Thursday, 23 April 2015

ख़ामोशी !

ख़ामोशी !

तेरे सुनहरे बाल,
 धधकती आँखें ,
 चमकते गाल ,
 लरजते औंठ , 
बहकी सी बातें , 
थिरकते हाथों का स्पर्श ,  
 हिरणी जैसी चाल ,
 तितली जैसी अठखेलियां
और 
 जिस्म की रूहानी गंध ,
सब कुछ कह देते हैं ,
बेशक़ तू
खामोश रहे .........!