ख़ामोशी !
तेरे सुनहरे बाल,
धधकती आँखें ,
चमकते गाल ,
लरजते औंठ ,
बहकी सी बातें ,
थिरकते हाथों का स्पर्श ,
हिरणी जैसी चाल ,
तितली जैसी अठखेलियां
और
जिस्म की रूहानी गंध ,
सब कुछ कह देते हैं ,
बेशक़ तू
खामोश रहे .........!
तेरे सुनहरे बाल,
धधकती आँखें ,
चमकते गाल ,
लरजते औंठ ,
बहकी सी बातें ,
थिरकते हाथों का स्पर्श ,
हिरणी जैसी चाल ,
तितली जैसी अठखेलियां
और
जिस्म की रूहानी गंध ,
सब कुछ कह देते हैं ,
बेशक़ तू
खामोश रहे .........!