Monday, 7 April 2014

A LETTER......EK CHITHEE PART-13

   दोस्तों ,
समझ नहीं आ रहा के ख़त की शुरुआत कहाँ से करूँ। घर में थोड़ा मरमत्त का काम था। ऐसी शुरूआत हुई के आटे दाल का भाव पता लग गया। हर चीज़ के भाव आसमां छू रहे हैं। मुझे तो बशीर बद्र साब का ये शेर याद आ रहा है ," लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में ,तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में।" हालाँकि ये शेर किसी और सन्दर्भ में लिखा गया है। थोडा सा काम करवाना था पर सारे घर में तोड़ फोड़ हो चुकी है।
15 दिन तो हो चुके हैं और कितने दिन लगेंगे इस का अंदाज़ लगाना मुश्किल है।
मेरे घर के आसपास बहुत सारे घरों को पूरी तरह गिरा कर नया बनाया जा रहा है। जिस तरह से काम चल रहा है ,उससे साफ़ है के लाखों खर्च होंगे। यहाँ तो दो ईंट लगाने में सांस फूल गए ! आश्चर्य होता है के इन लोगों के पास इतना पैसा कहाँ से आता है। लगता है इन लोगों की लॉटरी लगी है या कोई गढ़ा खजाना हाथ और या फिर कुछ गोल माल है।
कुछ दिन पहले ही अमेरिका से पारिवारिक मित्र मंजीत चीमा का फ़ोन आया था के वो हिंदुस्तान आ रहे हैं। अब तक दिल्ली पहुँच गए होंगे ।अभी तक उनसे सम्पर्क नहीं हो पाया है। 8 या 9 अप्रैल को उनका हमारे यहाँ आने का कार्यक्रम है। आ जाओ जी ! हम आप का बेसब्री से इन्तज़ार कर रहे हैं।
स्कूल में 31 मार्च को 2013 -14  सेशन का अंतिम दिन था। नए सेशन में बच्चों को अपना 100 %अनुभव और ज्ञान देने का संकल्प स्टाफ मीटिंग में लिया गया। ताकि बच्चे जीवन के इम्तहान में पास हो सकें। पिछले सेशंन में कुछ नए साथी अध्यापकों ने ज्वाइन किया और कुछ साथ छोड़ गए। पिछले 7 -8  साल से काम करते करते स्कूल अपना सा लगने लगा है। सभी साथी अध्यापक एक टीम की तरह काम करने लगे हैं। पुराने अध्यापकों में पूनम ,संगीता ,पूजा नगवाल ,संतोष ,मंजू और निर्मला ने विशेषतः काफी इम्प्रूव किया है। यही नहीं रेनू ,सुनीता भंडारी और नवज्योत में कमाल का बदलाव आया है। पूरी ज़िम्मेदारी से काम करने के लिए ये सब एक मिसाल बन चुकी हैं। कुछ बच्चे स्कूल छोड़ कर जाने वाले हैं और नए बच्चों का दाखिला भी शुरू हो चुका है।
1 अप्रैल को सुखमणी साब के पाठ और सरस्वती पूजन के साथ नए सेशन की शुरुआत की गई। पहले दिन कुल १३९ बच्चे स्कूल में आए। लोगों के दिमाग में ये रहता है के शुरुआत में पढ़ाई नहीं होती। बच्चों को नाना -नानी ,मामा -मामी या किसी और रिश्तेदार के घर छोड़ आते हैं। बाद में स्कूलों पर दोष मढ़ दिया जाता है के स्कूलों में पढ़ाई नहीं होती।इंग्लिश मीडियम में बच्चों को पढ़ाने की ललक कमाल की है। समझ नहीं आता के बच्चों के भविषय का क्या होगा।घर में कोई भी सदस्य पढ़ा न होने के बावजूद माँ -बाप बच्चों को इंग्लिश मीडियम में पढ़ाने का कोई ठोस जवाब नहीं दे पाते। कुछ समय के बाद जब बच्चे को इंग्लिश समझ नहीं आती और घर पर कोई पढ़ाने या समझाने वाला भी नहीं होता। जब तक माँ -बाप को  इस बात की समझ आती है तब तक काफी देर हो चुकी होती है।मेरा ये मानना है के शिक्षा प्रणाली में घोर परिवर्तन की ज़रुरत है।  शिक्षा पद्धति में मूलभूत परिवर्तन के साथ -साथ शिक्षा को तकनीकी और प्रायोगिक बनाना होगा। अन्यथा बच्चों के भविषय का "रब्ब राखा" है।
जीवन में पहली बार अप्रैल के महीने में ढंडक को महसूस कर के आश्चर्य के साथ -साथ चिंता भी हो रही है।आज भी बारिश हुई। कश्मीर में लगातार २४ घंटे बारिश से सभी हैरान हैं।  कहीं ये ग्लोबल वार्मिंग की दस्तक तो नहीं ! अमेरिका में इस बार _60 डिग्री तापमान से भी पर्यावरणविद चिंतित हैं। भूपंक और समुद्री तूफ़ान तो अब आम हो गए हैं।
एक और साथी "विक्की" मोह माया भरी दुनिया को अलविदा कह प्रभु चरणों में लीन हो गया।स्कूलों में पुस्तकें सप्लाई का स्थापित काम था। एक लम्बे अर्से से ज़िंदगी और मौत की जंग में जूझ रहा
"विक्की" अंततः मौत से जीत नहीं पाया। उसके घनिष्ठ मित्रों का कहना है के शराब बहुत पीता था।
७ अप्रैल को भारत के आम चुनावों के प्रथम चरण का मतदान हो चुका है। टी वी और अख़बारों के अलावा कहीं भी चुनावी रंग नज़र नहीं आ रहा। पिछले चुनावों के मुकाबले शोर शराबा और पोस्टरबाजी बहुत कम है। इस बार लोग मोदी की लहर का ज़िक्र आम कर रहे हैं। आम पार्टी का ज़िक्र खास नहीं रहा है। कांग्रेस के साथ पर लोग अपने पाँव के साथ साथ अपना हाथ भी पीछे खींच रहे हैं। देखना ये है के ऊंट किस करवट बैठता है।
   मेरी  से गुजारिश है के आप अपने वोट को व्यर्थ न जाने दें। वोट ज़रूर डालें और सोच समझ कर ! 
अच्छा दोस्तों फिर मिलते हैं। मेरी ओर से आप सब को ढेर सारी शुभकामनाएँ।
To be continued..................